भरत झुनझुनवाला

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं कृषि विषयों के जानकार देवेंदर शर्मा के अनुसार 1970 से 2015 के बीच खाद्यान्न के समर्थन मूल्य मे 20 गुना वृद्धि हुई है। इसी अवधि मे सरकारी कर्मियों के वेतन मे 120 गुणा वृद्धि हुई है। अतः किसानों की आय में वृद्धि अवश्य हो रही है,

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं कर्मठ एवं ईमानदार होने के बावजूद नोटबंदी से उद्यमी और उपभोक्ता दोनों ही सहम गए हैं। वे कछुए की तरह दुबक गए है। उन्हें पुनः विश्वास में लेना चाहिए। मूल चोर व्यापारी नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र है जो चोरी पर नियंत्रण करने के स्थान पर इस

डा. भरत झुनझुनवाला (लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं) शिक्षा की गुणवत्ता का आकलन करने के दो स्तर हैं-रटंत विद्या एवं समझ। देखा जाता है कि कक्षा में सर्वश्रेष्ठ अंक पाने वाले छात्र अकसर जीवन में पीछे  रह जाते है। एक सर्वश्रेष्ठ अंक पाने वाला बैंक में क्लर्क के पद पर ही पहुंच सका। दूसरा

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं अब देश में स्वतंत्र नियामकों की संस्कृति स्थापित हो गई है। जैसे दूरसंचार क्षेत्र के नियामक ने निजी टेलीफोन कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा स्थापित करके मोबाइल फोन काल के दाम वैश्विक न्यून स्तर पर लाने में सफलता हासिल की है। इस प्रकार सार्वजनिक इकाइयों पर सरकारी

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं ब्याज दर सकारात्मक होने से रिजर्व बैंक पर बोझ बढ़ेगा। असंगठित क्षेत्र दबाव में आएगा। इसी में अधिकतर रोजगार बनते हैं। टैक्स कर्मियों का भ्रष्टाचार बढ़ेगा, जैसे बैंक कर्मियों का नोटबंदी के दौरान देखा गया। हमारे नागरिक सोने की खरीद अधिक करेंगे। यह रकम देश के

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं वर्तमान में विशाल रकम जन कल्याणकारी योजनाओं पर व्यय की जा रही है, परंतु इनका लाभ आम आदमी तक कम ही पहुंच रहा है। इन योजनाओं में कार्यरत सरकारी कर्मियों को पोषित किया जा रहा है। जैसे राजीव गांधी ने कहा था कि दिल्ली से चले

डा. भरत झुनझुनवाला डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं फसल बीमा एक सही योजना है, परंतु इसका लाभ उन परिस्थितियों में है, जब फसल पर प्राकृतिक आपदा आ जाए। किसान की मुख्य समस्या दामों के गिरने की है। सरकार की नीतियों में इस समस्या का समाधान नहीं है। मेरे अनुसार सरकार द्वारा

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं शराब के सेवन से कष्ट को केवल कुछ समय तक राहत मिलती है। किसी भी समस्या का स्थायी समाधान शराब पीना नहीं है। दुर्भाग्य है कि हिंदू एवं ईसाई धर्मगुरु इस विषय पर मौन बने रहते हैं। देश में शराबबंदी को सफलतापूर्वक लागू करना है, तो

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं वर्तमान परिस्थिति में पाकिस्तान के जमींदार, उद्यमी परिवार तथा सेना सभी संतुष्ट हैं। असंतुष्ट केवल वहां की जनता है। अतः हमें पाकिस्तान की जनता को अपने साथ लेना चाहिए। इस कार्य मे गैर सरकारी संगठन हमारे सहायक हो सकते हैं। भारत को चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय डोनरों