भरत झुनझुनवाला

डा. भरत झुनझुनवाला ( लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं ) मैंने सत्तर के दशक में फ्लोरिडा विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा हासिल की थी। मेरे विभाग में 60 अध्यापकों में केवल दो की नौकरी पक्की थी। शेष सभी पांच वर्ष के ठेकों पर नियुक्त किए गए थे। चार वर्ष के बाद उनके कार्यों का मूल्यांकन

डा. भरत झुनझुनवाला ( लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं ) सरकार की काले धन का सफाया करने की मुहिम सही दिशा में है, परंतु इसे सफल बनाने के लिए पहले टैक्स की दर में कटौती करनी चाहिए। इसके बाद रेड की जाती तो उचित होता। काले धन के सफाए के नाम पर टैक्स की

डा. भरत झुनझुनवाला ( लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं ) भारत-पाक गतिरोध के चलते सदस्य देशों ने सार्क को दरकिनार करते हुए द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौतों को संपन्न करना शुरू कर दिया है। इस दृष्टिकोण को अपनाते हुए श्रीलंका के व्यापार मंत्री ने हाल में कहा, ‘श्रीलंका का प्रयास है कि पाकिस्तान तथा भारत

डा. भरत झुनझुनवाला ( लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं ) एनडीए सरकार द्वारा गंगा से बिजली, पानी एवं जहाजरानी लेने-लेने का ही प्रयास किया जा रहा है। गंगा में प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम सही दिशा में हैं। नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा को प्रशासनिक अधिकार देने का स्वागत

डा. भरत झुनझुनवाला ( लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं ) विदेशी कंपनियों के पास उन्नत तकनीकें होती हैं। इससे वे उत्तम गुणवत्ता का सस्ता माल बना सकती हैं। इससे हमारे उपभोक्ता को लाभ होता है। दूसरी तरफ इनके द्वारा मुख्य रूप से स्वचालित मशीनों से उत्पादन किया जाता है। फलस्वरूप हमारे उद्यमियों एवं श्रमिकों

डा. भरत झुनझुनवाला ( लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं ) आज कई फार्म विशेष प्रकार के फल पैदा कर रहे हैं। जैसे तरबूज के फल को चौकोर आकार के डिब्बों में बंद कर दिया जाता है। वे बड़े होकर चौकोर आकार में तैयार होते हैं। इनका दाम अधिक मिलता है। इसी तरह आजकल पूरे

डा. भरत झुनझुनवाला ( लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं ) दवाओं के मूल्य न्यून बने रहें, इसके लिए दूसरे कदम भी सरकार को उठाने चाहिए। पहला कदम है कि सामान्य दवाओं पर ब्रांड लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया जाए। साथ-साथ डाक्टरों पर प्रतिबंध लगाया जाए कि वे जेनेरिक दवाओं की पर्ची लिखें व निर्माता

डा. भरत झुनझुनवाला (लेखक, आर्थिक विश्लेषक  एवं टिप्पणीकार हैं) देखना चाहिए कि उपभोक्ता पर न्यूनतम भार डाल कर अधिकतम रोजगार की रक्षा किन क्षेत्रों में हो सकती है। केवल ई-रिटेल पर प्रतिबंध लगाकर किराना की रक्षा करने से बात नहीं बनेगी चूंकि तमाम दूसरे क्षेत्रों में रोजगार का भक्षण जारी रहेगा। प्रतीत होता है कि

डा. भरत झुनझुनवाला ( लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं ) केंद्रीय कर्मियों के वेतन में की गई वृद्धि से कार निर्माताओं में बन रहा उत्साह सही है, लेकिन समग्र अर्थव्यवस्था की दृष्टि से यह हानिप्रद होगा। बाजार में कुल मांग में तनिक भी वृद्धि नहीं होगी। केंद्रीय कर्मियों द्वारा कार अवश्य अधिक खरीदी जाएंगी,