भरत झुनझुनवाला

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं अब देश में स्वतंत्र नियामकों की संस्कृति स्थापित हो गई है। जैसे दूरसंचार क्षेत्र के नियामक ने निजी टेलीफोन कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा स्थापित करके मोबाइल फोन काल के दाम वैश्विक न्यून स्तर पर लाने में सफलता हासिल की है। इस प्रकार सार्वजनिक इकाइयों पर सरकारी

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं ब्याज दर सकारात्मक होने से रिजर्व बैंक पर बोझ बढ़ेगा। असंगठित क्षेत्र दबाव में आएगा। इसी में अधिकतर रोजगार बनते हैं। टैक्स कर्मियों का भ्रष्टाचार बढ़ेगा, जैसे बैंक कर्मियों का नोटबंदी के दौरान देखा गया। हमारे नागरिक सोने की खरीद अधिक करेंगे। यह रकम देश के

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं वर्तमान में विशाल रकम जन कल्याणकारी योजनाओं पर व्यय की जा रही है, परंतु इनका लाभ आम आदमी तक कम ही पहुंच रहा है। इन योजनाओं में कार्यरत सरकारी कर्मियों को पोषित किया जा रहा है। जैसे राजीव गांधी ने कहा था कि दिल्ली से चले

डा. भरत झुनझुनवाला डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं फसल बीमा एक सही योजना है, परंतु इसका लाभ उन परिस्थितियों में है, जब फसल पर प्राकृतिक आपदा आ जाए। किसान की मुख्य समस्या दामों के गिरने की है। सरकार की नीतियों में इस समस्या का समाधान नहीं है। मेरे अनुसार सरकार द्वारा

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं शराब के सेवन से कष्ट को केवल कुछ समय तक राहत मिलती है। किसी भी समस्या का स्थायी समाधान शराब पीना नहीं है। दुर्भाग्य है कि हिंदू एवं ईसाई धर्मगुरु इस विषय पर मौन बने रहते हैं। देश में शराबबंदी को सफलतापूर्वक लागू करना है, तो

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं वर्तमान परिस्थिति में पाकिस्तान के जमींदार, उद्यमी परिवार तथा सेना सभी संतुष्ट हैं। असंतुष्ट केवल वहां की जनता है। अतः हमें पाकिस्तान की जनता को अपने साथ लेना चाहिए। इस कार्य मे गैर सरकारी संगठन हमारे सहायक हो सकते हैं। भारत को चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय डोनरों

डा. भरत झुनझुनवाला ( लेखक, आर्थिक विश्लेषक  एवं टिप्पणीकार हैं ) हमें मुक्त व्यापार के मूल सिद्धांत पर पुनर्विचार करना चाहिए। डब्ल्यूटीओ 1995 में लागू हुआ था। तब सोचा गया था कि यह व्यवस्था सभी के लिए लाभदायक सिद्ध होगी। बीते 20 वर्षों में स्पष्ट हो गया है कि मुक्त व्यापार फेल है, चूंकि इसमें

डा. भरत झुनझुनवाला डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं वास्तविकता यह है कि सरकारी कालेजों की हालत ज्यादा खस्ता है। इन्हें प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं करना पड़ता। छात्रों से वसूल की जाने वाली फीस कम होने से आवेदक पर्याप्त संख्या में मिल जाते हैं, परंतु अध्यापकों की पठन-पाठन में रुचि नहीं होती

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं हिंदू धर्म कहता है कि अंतर्मन की आवाज सुनो। योग और ध्यान के माध्यम से अपनी अंदरूनी वृत्ति को पहचानो और मन को सांसारिक खिंचावों से हटाकर अंतर्मन की ओर ले जाओ। बौद्ध धर्म मध्यम मार्ग को बढ़ावा देता है। विज्ञापन में बहने के स्थान पर