काबिल अफसर मजबूत सरकार-2

जयराम सरकार के एक साल की कामयाबी में प्रदेश के अफसरों के ईमानदारप्रयास शामिल हैं। मनीषा नंदा हों या राम सुभग, फिर डीसी राणा या विनय सिंह, डा. अरुण, या अनिल खाची, हिमाचल सरकार को इन काबिल अफसरों पर नाज है। दखल के इस अंक में प्रदेश के…

काबिल अफसर मजबूत सरकार

जन आभार रैली में प्रधानमंत्री से तारीफ पाने वाली जयराम सरकार की कामयाबी के पीछे उन अफसरों का भी कम हाथ नहीं, जो चुटकी बजाते ही 5जी की स्पीड से हर काम ओके कर देते हैं। बात बीके अग्रवाल की हो या फिर श्रीकांत बाल्दी की, रामसुभग हों या आरडी…

हिमाचल सरकार का एक साल

एक साल पहले हिमाचल में सत्ता परिवर्तन और जयराम ठाकुर के रूप में सीएम का नया चेहरा सामने आने से लोगों की उम्मीदें भी बढ़ गईं। एक साल के सफर में प्रदेश सरकार लोगों की कसौटी पर कितना खरा उतर पाई, कौन से ऐसे क्षेत्र हैं, जहां सरकार जनमानस की…

क्षमता से कितना बाहर मंडी

मंडी शहर की स्थापना 1527 ईस्वी में राजा अजबर सेन ने की थी।  शहर प्रदेश के सबसे प्राचीन नगरों में से एक है, लेकिन दुखद यह है कि यह शहर न तो अपनी प्राचीन विरासत को सही तरह से समेट रख सका  और न ही एक आधुनिक शहर बन पाया है। बेतरतीब निर्माण की…

क्षमता से कितना बाहर ज्वालामुखी

दुनिया को  पवित्र ज्योति से निहाल करने वाली मां ज्वाला की नगरी अब भीड़ का शहर दिखती है। यहां रास्ते-ट्रैफिक, पानी-प्लानिंग समय की बहुत बड़ी जरूरत हैं , कुछ ऐसे ही मुद्दों को दखल के जरिए उठा रहे हैं... शैलेष शर्मा विश्वविख्यात शक्तिपीठ…

क्षमता से कितना बाहर बज्रेश्वरी

4448 एकड़ में फैली कांगड़ा नगरी के नगर परिषद क्षेत्र के नौ वार्डों की जनसंख्या मौजूदा समय में करीब 18000 है ,जबकि इसके आसपास लगती पंचायतों हलेड़कला, बीरता व जोगीपुर के अधिकांश इलाके का शहरीकरण हो चुका है ,लेकिन यह इलाके नगर परिषद से बाहर…

क्षमता से कितना बाहर चिंतपूर्णी

शक्तिपीठ माता चिंतपूर्णी मंदिर लाखों श्रदालुओं की आस्था का केंद्र है। समय के साथ श्रद्धालुओं की संख्या में तो इजाफा हुआ है, लेकिन भक्तों की बढ़ती संख्या के अनुरूप सुविधाओं को जुटा पाने में मंदिर प्रशासन सफल नहीं हो पाया है। रही-सही कसर…

क्षमता से कितना बाहर नयनादेवी

श्रद्धालुओं की आमद के साथ-साथ श्रीनयनादेवी में अंधाधुंध निर्माण भी बढ़ा है, जिसने शहर की सूरत ही बिगाड़ कर रख दी है। उत्तरी भारत के प्रसिद्ध मंदिर में पहुंचने वाले भक्तों को पेश आने वाली मुश्किलों और खामियों को दखल के जरिए पेश कर रहे…

क्षमता से कितना बाहर दियोटसिद्ध

साल भर में 14 लाख भक्त, 23 करोड़ आय, 200 दुकानें और 250 कर्मी। भले ही ये आंकड़े दुनियाभर में सिद्धपीठ दियोटसिद्ध का डंका बजा रहे हैं, मगर तस्वीर का दूसरा पहलू उतना ही खराब है। आज तक न कोई मास्टर प्लान बना, न ही पार्किंग का स्थायी समाधान…

क्षमता से कितना बाहर डलहौज़ी

धौलाधार व पीर पंजाल पर्वत शृंखला के मध्य पांच पहाडि़यों पर बसे पर्यटन स्थल डलहौजी की खूबसूरती को आधुनिकता की अंधी दौड़ ने ग्रहण लगाकर रख दिया है। हरे-भरे देवदार के पेड़ों से अटे डलहौजी शहर में होटल व भवनों की भरमार के चलते अब सुकून के दो पल…

क्षमता से कितना बाहर मनाली

मनाली का प्राकृतिक सौंदर्य ही मानों उसका दुश्मन बन गया है। सैलानियों की आमद ने यहां के हरे-भरे जंगलों को होटलों में तबदील कर दिया... लिहाजा कुदरती शृंगार को ऊंचे- ऊंचे आलीशान भवन निगल गए । बिल्डिंग के साथ बिल्डिंग सटी देख ऐसा लगता है,…

क्षमता से कितना बाहर मकलोडगंज

बौद्ध नगरी और विश्व विख्यात पर्यटन स्थल मकलोडगंज की खूबसूरती को अवैध निर्माण ने ग्रहण लगा दिया है। सैलानियों की बढ़ती आमद के दबाव में व्यवसायियों ने देवदार से लकदक इस खूबसूरत क्षेत्र को कंकरीट का जंगल बना दिया है। न कोई प्लानिंग , न सांस…

क्षमता से कितना बाहर शिमला

शिमला शहर  अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा भार ढो रहा है। कभी अंग्रेजों ने 25 हजार की आबादी के लिए यह नगर बसाया था, लेकिन आज इसकी जनसंख्या अढ़ाई लाख को भी पार कर गई है। यहां  निर्माण भी बेतरतीब किया गया है। चारों ओर इमारतें बनाने की होड़ मची हुई…

कुल्लू से नाराज कुदरत

जाती-जाती बरसात कुल्लू-मनाली को तो तबाह कर गई, पर साथ ही संदेश भी दे गई कि अभी वक्त है...संभाल लो खुद को, बचा लो प्रकृति, मत बदलो नदी-नालों का बहाव। किसी समय अपनी प्राकृतिक छटा से सबको आनंदित कर देने वाली मनाली आज कराह रही है अपने रंग-रूप…

सितमगर कुदरत

हिमाचल में मानसून हर साल कहर बनकर बरप रहा है। प्रदेश को बरसात से करोड़ों का नुकसान हो रहा है। कहीं अवैध खनन तो कहीं बिजली परियोजनाओं के लिए जारी ब्लास्टिंग से पहाड़ खोखले हो रहे हैं । पर्यावरण से की जा रही यही छेड़छाड़ घातक सिद्ध हो रही…