भूपिंदर सिंह

भूपिंदर सिंह राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक शारीरिक शिक्षा के प्राध्यापकों का कार्य तीन कक्षाओं में शारीरिक शिक्षा पढ़ाना, अंतर महाविद्यालय खेलों के लिए टीमों का प्रबंधन करने के साथ-साथ स्टोर कीपर व लिपिका कार्य भी स्वयं ही करना होता है। इस कालम के माध्यम से कई बार महाविद्यालय स्तर पर अनिवार्य रूप से शारीरिक शिक्षक पद

भूपिंदर सिंह राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हरियाणा के सोनीपत जिला के खरखौदा में प्रताप सिंह स्मारक वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के पास जहां सभी इंडोर खेलों के लिए आधारभूत ढांचा है, वहीं पर इस स्कूल के पास विभिन्न खेलों के पचास प्रशिक्षक भी नियुक्त हैं। हिमाचल प्रदेश में इस समय विभिन्न जिलों में सैकड़ों स्कूल निजी स्तर

भूपिंदर सिंह राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक जब प्रदेश की संतानें सीता व दीपक होकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा कर भारतीय टीम का मुख्य अंग बन सकती हैं, तो फिर हिमाचल के प्रशिक्षकों को चाहिए कि वे राज्य में ऐसा प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए, जिससे हिमाचल के खिलाडि़यों को राज्य से बाहर पलायन न

भूपिंदर सिंह राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक अब हिमाचल का युवा सेवाएं एवं खेल विभाग उसे प्रशिक्षक बना रहा है, जो जिला स्तर तक खेला है और 42 दिनों की ट्रेनिंग किए हुए है, मगर वह राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जो एक वर्ष की ट्रेनिंग किए हुए है, उसे छोड़ रहा है। हिमाचल में युवा सेवाएं एवं

भूपिंदर सिंह राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक आज प्रदेश के विभिन्न जिलों में कई खेलों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने वाली प्ले फील्ड बनकर तैयार हैं, मगर प्रदेश में खेल वातावरण के अभाव में खेल का यह स्तरीय ढांचा आज लावारिस बन गया है। धर्मशाला, हमीरपुर तथा बिलासपुर में आज तीन सिथेंटिक ट्रैक हैं, मगर

भूपिंदर सिंह राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक     प्रदेश में इस समय काफी निजी कालेज हैं, उन्हें भी हिमाचल के विद्यार्थी खिलाडि़यों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना चाहिए। प्रदेश के सरकारी कालेजों के प्राचार्यों व शारीरिक शिक्षा के प्राध्यापकों को चाहिए कि वे अपने-अपने कालेजों में खेल प्रशिक्षण सुविधा के अनुसार उस खेल को विकसित करें।

भूपिंदर सिंह राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक   हिमाचल प्रदेश में कई खेलों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधा कई जिलों में बनी हुई है। हमीरपुर तथा बिलासपुर में दो एथलेटिक्स के लिए सिंथेटिक ट्रैक है। ऊना में हाकी के लिए एस्ट्रोटर्फ बिछा है। वहां पर राज्य सरकार स्वयं या फिर केंद्र सरकार के साथ मिलकर

भूपिंदर सिंह राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हम चाहे कितने भी किताबी कीड़े बनकर अच्छे कालेजों  से चिकित्सक, अभियंता, प्रबंधक, प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी क्यों न बन जाएं, अगर हम शारीरिक रूप से फिट नहीं होंगे, तो हम ईमानदारी से देश व प्रदेश को साठ वर्ष की आयु तक अपनी सेवाएं पूर्ण रूप से नहीं दे पाएंगे।

भूपिंदर सिंह राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक मंडी से नालागढ़ तक के इस सफर के 45 वर्षों में काफी कुछ सुधरा है। हिमाचल में अंतरराष्ट्रीय स्तर के एक नहीं तीन सिंथैटिक टै्रक हैं। कई धावक-धाविकाएं राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता हैं, कई राष्ट्रीय तकनीकी अधिकारी हैं। ऐसे में हम अपने धावक-धाविकाओं को अच्छा मंच तो