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बिहार में राजनीतिक कशमकश

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं भाजपा की रणनीति यह है कि उसे बिहार में भी किसी अन्य सहयोगी दल पर निर्भर न रहना पड़े। केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा भी कोरी हैं और वह शुरू से ही भाजपा के साथ हैं, लेकिन भाजपा की मंशा…

सोशल मीडिया की दोधारी तलवार

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने रविवार को अहमदाबाद में आयोजित एक सभा में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वह भाजपा विरोधी प्रोपेगेंडा से सतर्क रहें, अपना दिमाग लगाएं और सोशल मीडिया पर चल…

राजनीति में नौकरशाही के शुभ संकेत

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं मोदी और शाह की सहमति से बने इस मंत्रिमंडल में नौकरशाहों का आगमन एक अच्छी शुरुआत साबित हो सकती है। प्रोफेशनल्स का राजनीति में आना अच्छा है, बशर्ते वे राजनीति की गंदगी के गुलाम न हो…

बाबाओं की समानांतर सत्ता के दुष्फल

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं बाबाआें के पास जो भीड़ जमा होती है, उसके मूल में दुख है, अभाव है, गरीबी है या अशांति है। कोई बेटे से परेशान है, कोई बहू से, कोई नौकरी से, कोई जमीन के झगड़े में फंसा है और किसी को…

साधारण सी चैकलिस्ट के असाधारण मायने

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं हादसा रेल का हो, बाढ़ का हो, सूखे का हो या बीमारियों का, हर खतरे से बचने के लिए विस्तृत चैकलिस्ट बनाई जानी चाहिए। उसके मुताबिक समय रहते आवश्यक सावधानियां अपनाई जानी चाहिएं ताकि हादसे न…

आजादी के कुछ फीके एहसास

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं हम जो आजादी चाहते हैं, वह ऐसी होनी चाहिए कि हमें अपने साधारण कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, बल्कि तकनीक के सहारे वे काम संबंधित विभागों द्वारा खुद-ब-खुद हो जाएं।…

वैचारिक उतावलेपन का दौर

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं ऐसे बहुत से लोग हैं जो किसी भी राजनीतिक दल से या राजनीतिक विचारधारा से नहीं जुड़े हैं। ऐसे लोग कुछ मुद्दों पर प्रधानमंत्री मोदी का समर्थन करते हैं और कुछ मुद्दों पर उनका विरोध करते…

सियासी समीकरणों के बीच उलझा चिंतन

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं एस. राधाकृष्णन, डा. जाकिर हुसैन से लेकर भैरों सिंह शेखावत और वर्तमान उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी तक सभी उपराष्ट्रपतियों की योग्यता और योगदान का लंबा इतिहास रहा है। इनमें से बहुत…

नई आशाओं की राष्ट्रपति प्रणाली

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं अब समय आ गया है कि हम राष्ट्रपति प्रणाली अपनाएं, ताकि देश में कुछ विवेक का संचार हो सके। यह एक संयोग ही था कि उसी दिन मैंने भी ‘वह सुबह कभी तो आएगी’ शीर्षक से ट्वीट करके लिखा कि ‘काश…

दार्जिलिंग की दुखती रग

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग क्षेत्र में गोरखालैंड की मांग ने जोर पकड़ लिया है। गोरखा समुदाय उबल रहा है और मरने-मारने पर उतारू है। हमारी सेना में गोरखा बटालियन का इतिहास गौरवपूर्ण रहा है…

मोदी की अबूझ परंपराएं

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं मोदी समाज में एक ऐसी परंपरा की नींव डाल रहे हैं, जो अपने आप में बहुत खतरनाक है और भविष्य में इसके कई गंभीर परिणाम हो सकते हैं। भीड़ न पुलिस है, न सरकार और न न्यायालय। भीड़ सिर्फ भीड़…

कब तक तोते पालेंगे हम

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं देश के नागरिकों को अपना प्रतिनिधि चुनने के लिए अपनी मर्जी से वोट देने का अधिकार है, लेकिन चुने गए प्रतिनिधियों को संसद अथवा विधानसभा में अपनी मर्जी से वोट देने का अधिकार नहीं है। संसद…

असंतुलित प्रचार का महाअभियान

पीके खुराना वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं छत्तीसगढ़ में देशबंधु को छोड़कर अन्य अखबारों ने सरकार विरोधी विज्ञापन छापने से मना कर दिया। यानी अब पेड न्यूज वाला वह दौर भी चला गया, जब आप पैसे देकर कुछ भी छपवा सकते थे। आज के नए दौर में…

आंदोलन की राह पर खेती-किसानी

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं यह कोई अजूबा नहीं है कि सब्जी मंडी में मूली का भाव एक रुपए किलो हो और मंडी के गेट के बाहर वही मूली दस रुपए किलो के भाव से बिक रही हो। केंद्र सरकार इसे राज्य सरकार का मामला बता कर पल्ला…

भविष्य का उपभोग करते हम

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं नुकसान सिर्फ तापमान की बढ़ोतरी तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसका व्यापक प्रभाव है। हम जैसे- जैसे प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं वैसे-वैसे अस्थाई सुविधा, थोड़े से स्वाद, समय की बचत आदि…
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