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मोदी, तोगडि़या और तख्त

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं सन् 2008 में मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो राज्य में अवैध मंदिरों को गिराया गया था, जिससे नाराज होकर तोगडि़या ने मोदी के विरुद्ध बोलना शुरू किया। वह दरार समय के साथ-साथ बढ़ती चली…

जनहित की हांडी में पकती सियासत

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं सरकारी नौकरियां बेरोजगारी दूर करने का सबसे घटिया साधन है। यदि आवश्यकता न होने पर भी सरकारी पदों की संख्या बढ़ा दी जाए और नए लोग भर्ती कर लिए जाएं, तो नए लोगों का वेतन, भत्ता और अन्य…

भारत की लाचार संसदीय प्रणाली

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं नोटबंदी का फैसला हो, जीएसटी लागू करने की बात हो या फिर तीन तलाक का मामला, सब जगह संसद की अवहेलना की गई। कानून बनाने में विपक्ष की भूमिका सिर्फ आलोचना करने तक सीमित है। वह न कोई कानून…

लोकतांत्रिक संस्थाओं की हो हदबंदी

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं यदि हमने भ्रष्टाचार नियंत्रित करने की मंशा से न्यायपालिका को मनमानी करते रहने की छूट दे दी, तो कभी ऐसा हो सकता है कि न्यायपालिका सर्वशक्तिमान बन जाए और ऐसे में न्यायपालिका भी वह सब कुछ…

अहंकार में कटी पतंगों का हश्र

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं गुजरात में भाजपा की जीत में उसकी हार छिपी है और कांग्रेस की हार में उसकी जीत छिपी है, लेकिन हिमाचल प्रदेश का सबक स्पष्ट है कि सत्ता में रहते हुए भी यदि आपने जनता से संपर्क नहीं रखा तो…

बेलगाम सत्ता पर लगे विपक्ष की नकेल

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं यह अत्यंत खेद की बात है कि प्रधानमंत्री के विरोध को देशद्रोह का दर्जा दिया जाने लगा है। सरकार की यह मनमानी इसलिए चल रही है कि देश में प्रभावी विपक्ष नहीं है। सत्ता में भाजपा हो,…

मीडिया विमर्श का सिमटता दायरा

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं गुजरात के चुनाव और राहुल गांधी का कांग्रेस अध्यक्ष बनना इतनी बड़ी खबरें हैं कि लगता है देश भर की सारी समस्याएं खत्म हो गई हैं, सारे मुद्दे अप्रासंगिक हो गए हैं। राजनीतिज्ञों को तो जनता…

वार्ता से बहाल होगी घाटी में शांति

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं दिनेश्वर शर्मा की वापसी के बाद स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया केंद्र सरकार की आशाओं के अनुरूप नहीं थी। वस्तुतः ऐसी कार्रवाइयों से अविश्वास और बढ़ता है, नाउम्मीदी और बढ़ती है। इसके बजाय…

मोदी की विस्तारवादी महत्त्वाकांक्षा

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं भाजपा पहली बार केंद्र में अपने दम पर सत्ता में आई है। भाजपा निश्चय ही इसका लाभ उठा कर हर राज्य में अपने काडर को मजबूत करना चाहेगी, ताकि वह लंबे समय तक सत्ता में बनी रह सके। सोशल…

शक्तियों के लिए संघर्ष से उपजा संकट

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं लोकतंत्र की सफलता में शक्तियों के तर्कसंगत बंटवारे का मूल मंत्र भुला देना लोकतंत्र के लिए घातक सिद्ध हो सकता है और आज नहीं तो भविष्य में कोई अन्य नेता तानाशाह बन सकता है। इसी तरह…

वोट तक सीमित न हो लोकतंत्र

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं इस बार के चुनाव प्रचार में राज्य और स्थानीय महत्त्व के मुद्दे गोल कर दिए गए और राज्य के मुद्दों के साथ केंद्र के मुद्दों के घालमेल का प्रयास करके जनता को गुमराह करने का प्रयत्न किया…

कांग्रेस को चमत्कार की आस

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं यह सही है कि राहुल अभी मोदी के मुकाबले में कहीं नहीं दिखते। वह कांग्रेस उपाध्यक्ष बने रहें या अध्यक्ष बन जाएं, इससे आम जनता को कोई फर्क नहीं पड़ता, पर राहुल गांधी किसी भी रूप में मोदी…

मोदी जलवे की परीक्षा

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं हालिया सर्वेक्षण का निष्कर्ष यह है कि यदि आज चुनाव हो जाएं, तो भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में तो उभरेगी, लेकिन वह निर्धारित 360 सीटों का आंकड़ा नहीं छू पाएगी। वह 320 सीटों के आसपास सिमट…

भाजपा पर भारी गुजरात

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं मोदी के प्रधानमंत्री बनने में सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका रही है और मोदी ने कभी भी सोशल मीडिया का दामन नहीं छोड़ा। लेकिन अब सोशल मीडिया ही भाजपा के जी का जंजाल बन गया है। सोशल मीडिया पर…

बिहार में राजनीतिक कशमकश

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं भाजपा की रणनीति यह है कि उसे बिहार में भी किसी अन्य सहयोगी दल पर निर्भर न रहना पड़े। केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा भी कोरी हैं और वह शुरू से ही भाजपा के साथ हैं, लेकिन भाजपा की मंशा…
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