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पीके खुराना


साधारण सी चैकलिस्ट के असाधारण मायने

पीके खुराना

लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं

पीके खुरानाहादसा रेल का हो, बाढ़ का हो, सूखे का हो या बीमारियों का, हर खतरे से बचने के लिए विस्तृत चैकलिस्ट बनाई जानी चाहिए। उसके मुताबिक समय रहते आवश्यक सावधानियां अपनाई जानी चाहिएं ताकि हादसे न हों या कम से कम हों। जीवन के हर क्षेत्र में चैकलिस्ट का महत्त्व है। नौकरी में, व्यवसाय में, प्रशासन में, यात्रा में, हर जगह चैकलिस्ट का महत्त्व है और यदि हम इस छोटी सी सावधानी का ध्यान रखें तो हम बहुत सी अनावश्यक असफलताओं और विपदाओं से बच सकते हैं…

रेल हादसा हो या बाढ़ के रूप में प्रकृति का तांडव, एक बात तो साफ है कि हमारा सारा सिस्टम रामभरोसे चल रहा है। कहीं कोई ऐसी जुगत नहीं की जाती कि जो हादसा आज हुआ हो, उसके स्थायी इलाज के लिए कुछ किया जाए या किया जा सके। रेल हादसे होते हैं, खबरें छपती हैं, कुछ लोगों को सस्पेंड कर दिया जाता है, जांच बिठा दी जाती है और फिर हम सब उसे तब तक के लिए भुला देते हैं, जब तक कि अगला हादसा न हो जाए। साल-दर-साल बाढ़ आती है, सूखा पड़ता है, भू-स्खलन होता है, बीमारियां फैलती हैं लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया जाता कि हम उनसे हमेशा के लिए निजात पाने का कोई सिस्टम बना लें, कोई प्रणाली बना लें। मसलन, बाढ़ अगर हर साल आती है तो क्या मानसून से पहले गटर और सीवर की सफाई समय पर हो जाती है या बाढ़ आ जाने के बाद ही हम उस ओर ध्यान देते हैं? क्या इस पर कभी ध्यान दिया गया कि बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को मानसून से पहले ही सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट कर दिया जाए? क्या इन हादसों से बचने के लिए कोई चैकलिस्ट बनाई जाती है और उस पर अमल होता है?  यह बहुत ज्यादा पुरानी बात नहीं है जब भारतीय मूल के अमरीकी सर्जन डा. अतुल गवांडे की पुस्तक ‘दि चैकलिस्ट मेनिफेस्टो’ प्रकाशित हुई थी। इस पुस्तक में चैकलिस्ट की महत्ता को विस्तार से रेखांकित किया गया है। किसी भी काम में गलतियों से बचने के लिए चैकलिस्ट एक बहुत साधारण दिखने वाला असाधारण कदम है। वस्तुतः यह इतना साधारण नजर आता है कि हम अकसर इसकी महत्ता की उपेक्षा कर देते हैं। ‘द चैकलिस्ट मेनिफेस्टो’ डा. अतुल गवांडे की तीसरी पुस्तक है। इससे पहले उन्होंने ‘कंप्लीकेशन्स’ और ‘बैटर’ नामक दो पुस्तकें लिखी हैं, जिनकी सर्वत्र प्रशंसा हुई है। ‘द चैकलिस्ट मेनिफेस्टो’ भी एक असाधारण पुस्तक है, जो किसी भी काम में गलतियों की रोकथाम और काम में पूर्ण सफलता के लिए आवश्यक सावधानियों को रेखांकित करती है। सन् 2002 में प्रकाशित उनकी प्रथम पुस्तक ‘कंप्लीकेशन्स’ बोस्टन के एक अस्पताल में रेजिडेंट सर्जन के रूप में उनके अनुभवों का संग्रह है। अकसर डाक्टरों पर काम का बहुत बोझ होता है और जटिल आपरेशनों में उन्हें तुर्त-फुर्त निर्णय लेना होता है। दबाव की उन स्थितियों में भूल हो जाना या गलती हो जाना आम बात है। लेकिन एक छोटी सी भूल अथवा गलती किसी रोगी की जान ले सकती है। ये डाक्टर भी इनसान हैं जो जटिलतम परिस्थितियों में सेकेंडों में निर्णय लेने के लिए विवश हैं। यहां गलती की हर समय संभावना बनी रहती है। इनसान के रूप में हम गलतियों के पुतले हैं, अतः गलतियों की रोकथाम हमारे लिए सदैव से एक बड़ी चुनौती रही है। डा. गवांडे का कहना है कि वह इस बात में रुचि ले रहे थे कि लोग असफल क्यों होते हैं, समाज का पतन क्यों होता है और इसकी रोकथाम कैसे की जा सकती है। अमरीका में जनस्वास्थ्य नीति के एक प्रमुख चिंतक के रूप में उभरे डा. अतुल गवांडे की दूसरी पुस्तक ‘बैटर’ यह बताती है कि डाक्टर लोग सर्जरी के समय किस तरह गलतियों से बच सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि सर्जरी के समय कोई महत्त्वपूर्ण कार्य छूट न जाए। उनकी हालिया पुस्तक ‘दि चैकलिस्ट मेनिफेस्टो’ एक कदम आगे बढ़कर पूर्ण विस्तार से बताती है कि यदि डाक्टर लोग काम की पूर्णता और शुद्धता यानी ‘कॉग्नीटिव नेट’ का पालन करते हुए जटिल आपरेशनों से पहले चैकलिस्ट बना लें तो केवल स्मरणशक्ति पर निर्भर रहने के कारण होने वाली भूलों से बचा जा सकता है और कई कीमती जानें बचाई जा सकती हैं। उनके इस विचार को विश्व के आठ अलग-अलग अस्पतालों में टेस्ट किया गया और यह आश्चर्यजनक तथ्य सामने आया कि उन अस्पतालों में आपरेशन के बाद की मृत्यु दर में 50 प्रतिशत तक की कमी आ गई। पचास प्रतिशत! यह एक दुखदायी, परंतु कड़वा सच है कि अस्पतालों में होने वाली मौतों का 50 प्रतिशत डाक्टरों की छोटी-छोटी भूलों और गलतियों से होता है और इन गलतियों अथवा भूलों की रोकथाम करके बहुत से रोगियों की जानें बचाई जा सकती हैं। डा. गवांडे ने दो और महत्त्वपूर्ण बातें कही हैं। अमरीका के कनेक्टिकट में स्थित हार्टफोर्ड अस्पताल में लगभग 50 वर्ष पूर्व लगी एक आग के बाद लोगों ने डाक्टरों अथवा अस्पताल प्रबंधन पर दोष मढ़ने के बजाय बार-बार आग लगने के कारणों का पता लगाने का प्रयत्न किया तो अस्पताल में प्रयुक्त पेंट और सीलिंग की टाइलें अग्निरोधक नहीं थे और आग लगने की अवस्था में लोगों को बाहर निकालने की प्रक्रिया भी दोषपूर्ण थी। इन परिणामों के बाद एक विस्तृत चैकलिस्ट बनी और अमरीका में अस्पतालों के भवन निर्माण के नियमों में आवश्यक परिवर्तन किए गए। दूसरी और उससे भी कहीं ज्यादा महत्त्वपूर्ण बात यह है कि यदि गलतियों की रोकथाम न की जाए, तो समय बीतने के साथ-साथ हम जीवन में गलतियों और भूलों को जीवन का हिस्सा मानकर स्वीकार करना आरंभ कर देते हैं। यह एक खतरनाक प्रवृत्ति है और इसके दुष्प्रभाव को खत्म करने के लिए जरूरी है कि शुरुआती दौर में ही इससे निजात पा ली जाए। किसी कोर्स की पुस्तक संभावित गलतियों का जिक्र नहीं करती, कोई अध्यापक किसी कक्षा में गलतियों से बचने के तरीकों पर बात नहीं करता। यहां तक कि जानलेवा गलतियां भी सामान्य जीवन का हिस्सा बन जाती हैं। चैकलिस्ट की सहायता से हम उन गलतियों से बच सकते हैं। सन् 2003 में जब मेरे ज्येष्ठ सुपुत्र सुमित खुराना ने प्रतिष्ठित थापर विश्वविद्यालय से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग करने के बाद हमारे पारिवारिक व्यवसाय में कदम रखा, तो उसने हमारी कंपनी के हर कर्मचारी के कामकाज की विस्तृत चैकलिस्ट बनाई थी। उसमें ऐसे चरणों का जिक्र था जो दो दशक के अनुभव के बावजूद खुद मुझे भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं थे, लेकिन चैकलिस्ट के कारण एकदम से स्पष्ट हो गए।  तब से लगातार हम अपने हर काम से पहले चैकलिस्ट अवश्य बनाते हैं। चैकलिस्ट की सहायता हम तब भी लेते हैं, जब वह काम हम दस हजारवीं बार कर रहे हों। इससे किसी गलती अथवा काम की पूर्णता में कमी की आशंका कम से कम हो जाती है। हादसा रेल का हो, बाढ़ का हो, सूखे का हो, जंगली जानवरों द्वारा मानवीय बस्तियों में घुस आने का हो, बीमारियों का हो, हर खतरे से बचने के लिए विस्तृत चैकलिस्ट बनाई जानी चाहिए। उसके मुताबिक समय रहते आवश्यक सावधानियां अपनाई जानी चाहिएं ताकि हादसे न हों या कम से कम हों। डा. गवांडे के इस अनुभव में मैं सिर्फ इतना जोड़ना चाहूंगा कि जीवन के हर क्षेत्र में चैकलिस्ट का महत्त्व है। नौकरी में, व्यवसाय में, प्रशासन में, यात्रा में, हर जगह चैकलिस्ट का महत्त्व है और यदि हम इस छोटी सी सावधानी का ध्यान रखें तो हम बहुत सी अनावश्यक असफलताओं और विपदाओं से बच सकते हैं। आशा करनी चाहिए कि प्रशासन जागेगा और इस ओर ध्यान देगा, ताकि जान-माल के नुकसान से बचा जा सके।

ई-मेल : indiatotal.features@gmail.com

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