कर्नल (रि.) मनीष धीमान

थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवने की रिटायरमेंट के बाद अब भारतीय सेना के नए सीडीएस की नियुक्ति पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है कि देश को दूसरा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी सीडीएस कब मिलेगा और उसके लिए अभी कितना इंतजार करना पड़ेगा। पिछले महीने 30 अप्रैल को जब थल सेना अध्यक्ष जनरल

पिछले कुछ दिनों जब से पांच राज्यों के चुनावों के परिणाम आए हैं, हमारे गृह क्षेत्र हिमाचल में राजनीतिक सरगर्मियां इतनी बढ़ गई हैं कि आने वाले कुछ दिनों में बड़े उलटफेर और उथल-पुथल होने की संभावनाएं दिख रही हैं। कांग्रेस की हार व बीजेपी की जीत के साथ-साथ आम आदमी पार्टी की पंजाब में

टीकाकरण से जैसे ही ओमिक्रॉन का प्रभाव मंद पड़ा है, शहर-बाजारों की रौनक धीरे-धीरे लौटने लगी है और स्कूल भी करीब-करीब दो वर्ष बंद रहने के बाद बच्चों, नौनिहालों के कौतूहल से सजने लगे हैं। चुनाव आयोग ने भी रैलियां करने की अनुमति दे दी है। इस अनुमति का नेताओं ने भी भरपूर फायदा उठाना

सेना में नई वर्दी की बात तो चल रही है, पर यह मात्र कम्बैट या चितकबरी वर्दी को बदला जा रहा है, इसके अलावा भी सेना में अन्य आठ किस्म की वर्दियां पहनी जाती हैं। यह तो जाहिर है कि एक सैनिक और सिविलयन में जो फर्क आम देखा जा सकता है वह उनका हेयर

पिछले सप्ताह देश के कुछ राज्यों में मचे चुनावी शोर जिसमें नेता अपनी सहूलियत के हिसाब से दलबदल करके 5 वर्ष पहले जिस दल से चुनकर विधानसभा गए थे, अब उस दल से प्रत्याशी बनाने की उम्मीद कम होने पर दूसरा दल चुन रहे हैं। जनसेवा का जज्बा इतना कूट-कूट कर भरा है कि चाहे

चीन की विस्तारवादी सोच पर अंकुश एवं रोक तभी लग सकती है जब चीन की मंशा पर हर मंच पर चर्चा हो और खुले तौर पर इसकी भत्र्सना की जाए। इसके लिए जरूरी है कि प्रभावित देशों को इक_ा करके अमेरिका और जापान जैसे देश को अपने साथ लिया जाए। अगर विश्व के देशों की

अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा बनाई गई सरकार समावेशी हो और वहां से ड्रग्स की तस्करी तथा आतंकवादी गतिविधियों की बढ़ोतरी पर लगाम लगे, इसके लिए दिल्ली डायलॉग में खूब चिंतन हुआ और भारत ने इसे न केवल हमारे अपने देश के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बताया, बल्कि इस दौरान जिन मुद्दों पर चर्चा हुई,

दिवाली में मिठाई और भैया दूज में मेवों का राजशाही खानपान जैसे-जैसे खत्म हो रहा है, वैसे-वैसे सर्दी भी बढ़ना शुरू हो गई हैं। चद्दर से कंबल और कंबल से रजाई तक पहुंची हिमाचली ठंड का आकलन करें तो मध्य भारत की हिंदी पट्टी में मनाई जाने वाली छठ पूजा का नदी स्नान अगर गंगा

पिछले सप्ताह की मुख्य गतिविधियों पर नजर डालें तो हमारे अपने प्रदेश में उपचुनावों में व्यस्त सरकार और विपक्ष ने अपने-अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है। यह भी माना जा रहा है कि उपचुनावों के परिणाम से अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में जनता की राय का अंदाजा

पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने आजादी का अमृत महोत्सव मनाया और उसमें सरकार द्वारा किए गए कामों का व्याख्यान किया, पर जिस क्षेत्र में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा था उससे कुछ ही दूर लखीमपुर खीरी में उससे एक दिन पहले एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें कृषि कानूनों का विरोध