हाईब्रिड मॉडल के राज्य खत्म करो

प्रो. एनके सिंह अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार मेरा मानना है कि यह उचित समय है जब इस तरह की भ्रांतियों को एकदम खत्म करना होगा। राज्यों की व्यवस्था का जहां तक सवाल है, या तो केंद्र द्वारा शासित केंद्र शासित प्रदेश होने चाहिएं अथवा संपूर्ण…

राजनीति में बढ़ती अराजकता

प्रो. एनके सिंह अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार ममता बैनर्जी अपनी नैतिक जीत के दावे के लिए कारण खोज सकती हैं, फिर भी इस मामले में नैतिकता ने अपनी चमक खोई है। जबकि मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी संविधान के अनुपालन का दावा कर रही हैं, उन्होंने एक…

पर्यटन अवसर खो रहा हिमाचल

प्रो. एनके सिंह अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार हिमाचल में इस समय प्रति वर्ष पर्यटन से पांच हजार करोड़ रुपए की आय हो रही है। इसे दुगना किया जा सकता है। इसी तरह प्रति वर्ष हिमाचल आने वाले यात्रियों का आंकड़ा अभी 151 लाख है, इसे भी दोगुना…

गणतंत्र दिवस के नए संकल्प

प्रो. एनके सिंह अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार गणतंत्र दिवस मनाने का मूल लक्ष्य उन सभी राज्यों को एक साथ लाना था जो अपनी व्यापक विविधताओं के कारण पूरे वर्ष एक मंच पर नहीं आ पाते हैं। नेहरू ने इस समारोह में राज्यों की सामूहिकता तथा उनकी…

हिमाचल में कांग्रेस का असमंजस

प्रो. एनके सिंह अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार कांग्रेस जमीनी स्तर पर ऐसी गतिविधियों के बिना सुषुप्त अवस्था में पड़ी रही। खंड स्तर तथा विधानसभा क्षेत्र स्तर पर लड़ाइयां उभर आईं तथा न किसी ने सामंजस्य बनाने की कोशिश की, न कोई मध्यस्थता को…

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई

प्रो. एनके सिंह अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार सीबीआई व आरबीआई के मामले में सरकार प्रभावशाली ढंग से काम नहीं कर पाई। सरकार ने भ्रष्टाचार से लड़ने की प्रतिबद्धता तो दिखाई, किंतु इस लड़ाई को वह प्रभावशाली तरीके से नहीं लड़ पाई। शासन में…

मोदी का कोई विकल्प नहीं

प्रो. एनके सिंह अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार इंडिया टुडे, जिसका सामान्यतः भाजपा की ओर झुकाव नहीं है, के सर्वे में इसे 257 सीटें दी गई हैं जो कि पूर्ण बहुमत से 16 सीटें कम हैं। उधर सी वोटर ने एनडीए को 276 सीटें दी हैं जो कि पूर्ण बहुमत…

कलह के बीच आया नया साल

प्रो. एनके सिंह अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार सबसे पहले कांगे्रस ने यह महसूस किया कि चूंकि उसके लोकसभा में 543 सदस्यों में से केवल 44 सदस्य हैं, अतः वह पूरी ताकत के साथ प्रभावशाली तरीके से काम नहीं कर सकती है। इसलिए उसने अन्य दलों के…

राजनीति में धूमिल सच्चाई

प्रो. एनके सिंह अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार सच्चाई को इसलिए भी जानना जरूरी है क्योंकि प्रधानमंत्री को लेकर यह दावा किया जाता रहा है कि वह पूरी तरह ईमानदार हैं तथा अब तक उन्हें भ्रष्टाचार के किसी भी केस में संलिप्त नहीं पाया गया है।…

असमंजस में है भाजपा

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं मोदी के पास अब भी शानदार वापसी के कई अवसर हैं। इसके लिए यह जरूरी है कि वह भ्रष्टाचार के मामलों में कड़ाई से निपटें तथा अपनी छवि को दागदार न होने दें। छोटे और मझोले…

सार्वजनिक धन की फिजूलखर्ची

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं विचारों की एक पाठशाला मानती है कि शादी अथवा जीवन से जुड़े अन्य समारोहों पर लोग निजी रूप से जो धन खर्च करते हैं, वह जाया नहीं जाता है क्योंकि इससे एक बड़ी आबादी को…

हिमाचल को कई हवाई पट्टियों की जरूरत

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं यह बड़ी बात होगी अगर आप सभी गैर राजनीतिक विचारकों की सहभागिता के साथ एक एजेंडा तैयार करने के लिए वर्कशाप का आयोजन करते हैं। इस तरह की बैठक में हम विकास का दस्तावेज…

सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक जवाबदेही कहां है ?

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं कोर्ट के पास सभी शक्तियां हैं तथा वह यह जान सकती है कि किसने गोपनीयता के आदेशों का उल्लंघन किया और वह दंड भी दे सकती है। यह करने के बजाय कोर्ट ने झुंझलाहट का…

क्या राजनीति समय व संसाधनों की बर्बादी है ?

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं इसके विपरीत हमारे यहां कई तरह की औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं। यहां कई रीतियां हैं, वीआईपी के साथ कारों का काफिला चलता है, रक्षक दल साथ होता है तथा हर कोई अतिथि का…

मोदी के एजेंडे पर टालमटोल करती संस्थाएं

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं जैसा कि पिछले कुछ दिनों से देखा जा रहा है सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच कार्य-निष्पादन में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। हाल में रिजर्व बैंक के गवर्नर…