आखिर कब तक कोर्ट में उलझेगा कश्मीर मसला

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं पंचायत चुनाव के बहिष्कार की फारूक अब्दुल्ला की धमकी तथा इसी प्रकार की अन्य धमकियां सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली में बाधक नहीं बननी चाहिए। यह समझने योग्य है कि फारूक…

प्रभावशाली पड़ोसियों का रौब झेलता हिमाचल

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं हिमाचल में मसरूर टैंपल भी अंशत: नष्ट हो गया है और कोई यह नहीं जानता है कि यह क्या था। पूरा इतिहास भूतकाल के अवशेषों को सामने लाकर बनाया जा सकता है। ज्यादा शांतिपूर्ण…

भारत माता की जय या दुश्मन चिरंजीवी हों ?

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं आखिरकार ओसामा बिन लादेन एक बेरोजगार युवक नहीं था। स्पष्ट रूप से यह राजनीतिक प्रोपोगेंडा था, परंतु तथ्यों के प्रति सम्मान के बिना राहुल विदेशी जमीं पर अप्रमाणित सूचना…

भगत सिंह को बचाने में क्यों विफल हुए गांधी

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं महात्मा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस स्वतंत्रता के लिए ब्रिटिश राज के खिलाफ अहिंसक आंदोलन चलाए हुए थी। लाला लाजपत राय की जब एक पुलिस लाठीचार्ज में मृत्यु हो गई तो…

महागठबंधन को महा झटका

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं अब तक यह महागठबंधन कोई परिणाम देने में विफल रहा है और इसे तीन बड़े झटके लगे हैं। भविष्य में सफलता का उत्साहजनक इशारा यह नहीं कर रहा है। महागठबंधन को पहला झटका उस समय…

दुविधाओं के जाल में फंसी कांग्रेस

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं हर किसी को यह समझना चाहिए कि मोदी विकासात्मक लक्ष्यों के प्रति लोगों को प्रेरित करने के लिए एक कुशल रणनीति का अनुसरण कर रहे हैं। इसका परिणाम यह है कि कई विरोधियों की…

हिमाचल की बदतर होती स्वास्थ्य सेवाएं

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं एक सर्वे में यह तथ्य सामने आया कि 59 फीसदी ग्रामीण तथा 41 फीसदी शहरी जनसंख्या सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही चिकित्सा सुविधाओं से असंतुष्ट है। 45 फीसदी लोगों के…

एक अर्थहीन अविश्वास प्रस्ताव

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं अगर कांग्रेस यह जानना चाहती थी कि उसके भावी सहयोगी कौन-कौन हो सकते हैं तथा 2019 में उसकी कितनी संभावनाएं हैं, तो वह इसके लिए बेहतर नियोजन व समन्वय कर सकती थी। सदन…

हिंदुत्व का मर्म समझने में राजनेता विफल

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं हिंदुत्व के दुर्भावनापूर्ण प्रयोग का अधिक बुरा उदाहरण कांगे्रस नेता शशि थरूर ने पेश किया है जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी की आलोचना करने के लिए अपने ट्वीट में कहा कि…

शिक्षा की दुरावस्था को राजनीति जिम्मेदार

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं मैं कामना करता हूं कि हमारे यहां भी इस तरह के संस्थान खड़े किए जा सकते हैं तथा शिक्षा का मापदंड इतना ऊंचा उठाया जा सकता है कि अन्य राज्यों व देशों से छात्र पढ़ाई करने…

तकनीकी-सृजनात्मक निपुणता की जरूरत

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं भविष्य में नई तकनीकों की हमें जरूरत होगी। मिसाल के तौर पर बादल, डिजीटल वर्ल्ड, कार्य को करने तथा सफलता तलाशने के रास्तों का सृजन तथा कार्यात्मक सृजनशीलता को कोर्स में…

केजरीवाल की विचित्र नेतृत्व शैली

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं केजरीवाल ने जो किया और जिस रास्ते पर वह चल रहे हैं, उसकी तर्कसंगत व्याख्या कोई नहीं कर सकता और कोई इसे न्यायोचित नहीं ठहरा सकता। उन्होंने पार्टी का चुनाव चिन्ह झाडू…

कश्मीर के संघर्ष विराम में उभरा नायक

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं राष्ट्रीय राइफल के एक युवा जवान औरंगजेब को उस समय मार दिया गया जब वह मुसलमानों में सबसे ज्यादा मनाए जाने वाले त्योहार ईद के लिए बिना हथियारों के अपने घर आ रहा था।…

संघ वही संघ है, प्रणब वही प्रणब हैं

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं उन्होंने राष्ट्रवाद की परिभाषा, भाषा व भौगोलिक सीमा के उत्पाद के रूप में नहीं, बल्कि एक देश की संस्कृति व सभ्यता के रूप में की। उन्होंने कहा कि यूरोपीय राष्ट्रीय…

हिंदुत्व को नीचा दिखा रही पंथनिरपेक्षता

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं हमारे संविधान निर्माताओं को पंथनिरपेक्षता शब्द को संविधान में डालने की जरूरत महसूस नहीं हुई, लेकिन बाद में जब वोट की राजनीति का विकास हुआ तो इसे एक आदर्श के रूप में…