हिमाचल की बदतर होती स्वास्थ्य सेवाएं

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं एक सर्वे में यह तथ्य सामने आया कि 59 फीसदी ग्रामीण तथा 41 फीसदी शहरी जनसंख्या सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही चिकित्सा सुविधाओं से असंतुष्ट है। 45 फीसदी लोगों के…

एक अर्थहीन अविश्वास प्रस्ताव

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं अगर कांग्रेस यह जानना चाहती थी कि उसके भावी सहयोगी कौन-कौन हो सकते हैं तथा 2019 में उसकी कितनी संभावनाएं हैं, तो वह इसके लिए बेहतर नियोजन व समन्वय कर सकती थी। सदन…

हिंदुत्व का मर्म समझने में राजनेता विफल

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं हिंदुत्व के दुर्भावनापूर्ण प्रयोग का अधिक बुरा उदाहरण कांगे्रस नेता शशि थरूर ने पेश किया है जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी की आलोचना करने के लिए अपने ट्वीट में कहा कि…

शिक्षा की दुरावस्था को राजनीति जिम्मेदार

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं मैं कामना करता हूं कि हमारे यहां भी इस तरह के संस्थान खड़े किए जा सकते हैं तथा शिक्षा का मापदंड इतना ऊंचा उठाया जा सकता है कि अन्य राज्यों व देशों से छात्र पढ़ाई करने…

तकनीकी-सृजनात्मक निपुणता की जरूरत

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं भविष्य में नई तकनीकों की हमें जरूरत होगी। मिसाल के तौर पर बादल, डिजीटल वर्ल्ड, कार्य को करने तथा सफलता तलाशने के रास्तों का सृजन तथा कार्यात्मक सृजनशीलता को कोर्स में…

केजरीवाल की विचित्र नेतृत्व शैली

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं केजरीवाल ने जो किया और जिस रास्ते पर वह चल रहे हैं, उसकी तर्कसंगत व्याख्या कोई नहीं कर सकता और कोई इसे न्यायोचित नहीं ठहरा सकता। उन्होंने पार्टी का चुनाव चिन्ह झाडू…

कश्मीर के संघर्ष विराम में उभरा नायक

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं राष्ट्रीय राइफल के एक युवा जवान औरंगजेब को उस समय मार दिया गया जब वह मुसलमानों में सबसे ज्यादा मनाए जाने वाले त्योहार ईद के लिए बिना हथियारों के अपने घर आ रहा था।…

संघ वही संघ है, प्रणब वही प्रणब हैं

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं उन्होंने राष्ट्रवाद की परिभाषा, भाषा व भौगोलिक सीमा के उत्पाद के रूप में नहीं, बल्कि एक देश की संस्कृति व सभ्यता के रूप में की। उन्होंने कहा कि यूरोपीय राष्ट्रीय…

हिंदुत्व को नीचा दिखा रही पंथनिरपेक्षता

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं हमारे संविधान निर्माताओं को पंथनिरपेक्षता शब्द को संविधान में डालने की जरूरत महसूस नहीं हुई, लेकिन बाद में जब वोट की राजनीति का विकास हुआ तो इसे एक आदर्श के रूप में…

हिमाचल की कोई विमानन नीति नहीं

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं मैं मुख्यमंत्री से अपील करना चाहूंगा कि हमें एक ऐसी विमानन नीति बनानी चाहिए, जो राज्य के विकासपरक हितों को समुचित रूप से संबोधित करे। हमें राजनीतिक नजरिए से विमानन…

कर्नाटक सरकार तक राजनीति की नैतिकता

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं कांग्रेस शासित राज्यों की घटती संख्या के कारण कर्नाटक, कांग्रेस के लिए जीवन-मरण का प्रश्न बन चुका था। सोनिया गांधी ने इस मामले को तुरंत सुलझाते हुए दक्षिण में भाजपा…

सत्ता व गौरव की प्रतीक विखंडित होती प्रतिमाएं

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं मोदी को, जो कि हालांकि जीते हैं, अपनी जीत पर विनम्र होना चाहिए। इस जीत का जश्न उपद्रव के साथ नहीं, बल्कि गंभीरता के साथ मनाना चाहिए। हमने पूर्वोत्तर में कई कहानियां…

क्या यह कांग्रेस मुक्त भारत की शुरुआत है ?

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं इन सब स्थितियों को ध्यान में रखते हुए तथा अब तक गतिविधियों का जो विकासक्रम चला है, उसे देखते हुए लगता है कि यूपीए को इतनी ज्यादा सीटें मिलने वाली नहीं हैं तथा उसे…

नेताओं तथा मीडिया में विकृत होता विश्वास

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं सत्ता के खिलाफ लिखने या बोलने के खिलाफ किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया था, न ही किसी पर कोई पाबंदी लगाई गई थी। दूसरी ओर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र…

संवैधानिक संस्थानों पर यह आक्रमण क्यों?

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं यह एक वास्तविकता है कि संसद व न्यायपालिका जैसे संस्थान हमें एक लंबे संघर्ष के बाद मिले तथा इसमें जवाहर लाल नेहरू जैसे नेताओं का भी योगदान रहा। फिर आज क्यों वही लोग इन…