आस्था

भारतीय संस्कृति कुछ आधारभूत संकल्पनाओं से मिलकर बनी है। इन अवधारणाओं से परिचित हुए बिना भारतीय संस्कृति के अतःस्थल तक...

वर्ग का हथेली में दिखाई देना सामान्य है, परंतु इसके परिणाम सुखद हैं। चार भुजाओं से घिरे क्षेत्र को वर्ग...

अंतर्यामी परमात्मा ही सूर्य के भीतर शासन करते हैं। सूर्यआध्यत्मिक स्वरूप हैं ,अमृतमय हैं, वैदिकदेवता हैं तथा प्रत्यक्ष देव हैं।...

सनकाचार्य  जी बोले — गंगातटवर्ती वाराणसी भी एक उत्तम तीर्थ तथा श्रेष्ठ क्षेत्र है। यहां सभी देवता विराजमान रहते हैं।...

अष्ट का पति काव्य, पञचाब्द्, नाम के पितर होते हैं। इनके संवत्सर का नाम अग्नि, परिवत्सर सूर्य, इद्वत्सर चंद्रमा, अनुवत्सर...

पदम पुराण भगवान नारायण जगत की सृष्टि, रक्षा और संहार की व्यवस्था करके स्वयं अंतर्हित हो जाते हैं। इस तरह...

एक बार मुनि श्री नारद विश्व के रचनाकार ब्रह्मा, पालनहार विष्णु और संहार करने वाले शिव को नमस्कार करते हुए...

‘प्रवृत्तिं च निवृत्तिं च जना न विदुरासुराः। न शौचं नापि चाचारो न सत्यं तेषु विद्यते॥’ (आसुराः) असुर स्वभाव वाले (जनाः)...

यही कारण है कि शिव-शिलाओं से युक्त वह क्षेत्र सोमेश्वर कहा जाता है। इन क्षेत्रों में कुछ शिलाएं चंकनाभा है,...