आस्था

हमारी जिंदगी में टेक्नोलॉजी की जरूरत दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। यह हमें अपडेट जरूर रखती है मगर साथ ही कई ऐसी बीमारियां भी लेकर आती है, जिनसे हम अनजान होते हैं। इन्हीं में शामिल हैं ईयरफोन, जो कि एक ऐसी चीज बन गया है कि घर से बाहर आते ही सबके कानों में

श्रीश्री रविशंकर सत्य की खोज में आमतौर पर विज्ञान और अध्यात्म को एक-दूसरे से भिन्न माना जाता है। दोनों का ही आधार स्तंभ है जिज्ञासा। आधुनिक विज्ञान वस्तुनिष्ठ विश्लेषण का तरीका अपनाता है और अध्यात्म आत्मपरक विश्लेषण करता है। यह क्या है जगत में, यह क्या है? इन प्रश्नों के साथ विज्ञान बाहरी जगत को

सद्गुरु  जग्गी वासुदेव आपकी अभिलाषा कौन सी है? जो भी काम हाथ में लें उसमें सफलता मिलनी चाहिए, यही न? पश्चिम के मनोवैज्ञानिक यही सीख देते, ‘सफलता मिले, सफलता मिले’ इन्हीं शब्दों को बार-बार रटते रहें। आपका प्रत्येक कार्य, हरेक कदम सफलता पर लक्षित रहे। ऐसे प्रयास से बहुत संभव है, आपका रक्तचाप बढ़ जाए।

आपने बहुत से लोगों को कहते हुए सुना होगा कि उनके शरीर के किसी भी अंग में सुन्नपन आ जाता है। ऐसा खून के थक्के होने के कारण होता है। खून के थक्के आमतौर पर पैरों की नसों में पाए जाते हैं। हालांकि यह एक बहुत ही आम बीमारी है, लेकिन अनदेखी करने पर जानलेवा

श्रीराम शर्मा लोक सेवा के लिए मन में उमंग और उत्साह उठने के बाद तत्काल उस ओर प्रवृत्त नहीं हुआ जा सकता। इसके लिए अपना दृष्टिकोण बदलना पड़ता है। मान्यताओं में आवश्यक परिवर्तन करना पड़ता है, तब कहीं जाकर सेवा साधना संभव होती है। मनुष्य के पास थोड़ी सी शक्तियां हैं और छोटा सा जीवन

ओशो जन्म संसार है, जीवन परमात्मा। जन्म जीवन तो नहीं है, लेकिन जीवन में वह गति का द्वार हो सकता है, लेकिन साधारणतः वह मृत्यु का ही द्वार सिद्ध होता है। उस पर ही छोड़ देने से ऐसा होता है। साधना जन्म को जीवन बना सकती है… किस संबंध में आपसे बातें करूं, जीवन के

अहं कर्त्तेत्यहंमान महाकृष्णाहि दंशितः। नाहं कर्त्तेति विश्वासामृतं पीत्वा सुखी भव।। ‘मैं कर्ता हूं’- इस अहंकार रूपी अतिशय काले व विशाल सर्प से दंशित तू ‘मैं कर्ता नहीं हूं’ इस विश्वासरूपी अमृत का पान करके सुखी हो। अहंकार को काले सर्प की संज्ञा देते हुए अष्टावक्र कहते हैं कि जिसको भी यह काला सर्प दंश लेता

भगवती की उपासना के लिए ‘सौंदर्य लहरी’ आद्यशंकराचार्य का साधकों को दिया गया अप्रतिम उपहार है। वाह्य रूप से देखें तो यह एक निष्पाप हृदय द्वारा भगवती की उपासना प्रतीत होती है। गहराई में विचार करने पर साधकों को यह तंत्र के गुह्य रहस्यों का संचय प्रतीत होती है। अपनी काव्यात्मकता के लिए सौंदर्य लहरी

12 फरवरी रविवार, फाल्गुन, कृष्णपक्ष द्वितीया, फाल्गुन संक्रांति 13 फरवरी सोमवार, फाल्गुन, कृष्णपक्ष तृतीया 14 फरवरी मंगलवार, फाल्गुन, कृष्णपक्ष  चतुर्थी, अंगारकी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत 15 फरवरी बुधवार, फाल्गुन, कृष्णपक्ष  पंचमी 16 फरवरी बृहस्पतिवार, फाल्गुन, कृष्णपक्ष पंचमी, वसंत ऋतु प्रारंभ 17 फरवरी शुक्रवार, फाल्गुन, कृष्णपक्ष, षष्ठी 18 फरवरी शनिवार, फाल्गुन, कृष्णपक्ष, सप्तमी