क्षमता से कितना बाहर नयनादेवी

श्रद्धालुओं की आमद के साथ-साथ श्रीनयनादेवी में अंधाधुंध निर्माण भी बढ़ा है, जिसने शहर की सूरत ही बिगाड़ कर रख दी है। उत्तरी भारत के प्रसिद्ध मंदिर में पहुंचने वाले भक्तों को पेश आने वाली मुश्किलों और खामियों को दखल के जरिए पेश कर रहे…

क्षमता से कितना बाहर दियोटसिद्ध

साल भर में 14 लाख भक्त, 23 करोड़ आय, 200 दुकानें और 250 कर्मी। भले ही ये आंकड़े दुनियाभर में सिद्धपीठ दियोटसिद्ध का डंका बजा रहे हैं, मगर तस्वीर का दूसरा पहलू उतना ही खराब है। आज तक न कोई मास्टर प्लान बना, न ही पार्किंग का स्थायी समाधान…

क्षमता से कितना बाहर डलहौज़ी

धौलाधार व पीर पंजाल पर्वत शृंखला के मध्य पांच पहाडि़यों पर बसे पर्यटन स्थल डलहौजी की खूबसूरती को आधुनिकता की अंधी दौड़ ने ग्रहण लगाकर रख दिया है। हरे-भरे देवदार के पेड़ों से अटे डलहौजी शहर में होटल व भवनों की भरमार के चलते अब सुकून के दो पल…

क्षमता से कितना बाहर मनाली

मनाली का प्राकृतिक सौंदर्य ही मानों उसका दुश्मन बन गया है। सैलानियों की आमद ने यहां के हरे-भरे जंगलों को होटलों में तबदील कर दिया... लिहाजा कुदरती शृंगार को ऊंचे- ऊंचे आलीशान भवन निगल गए । बिल्डिंग के साथ बिल्डिंग सटी देख ऐसा लगता है,…

क्षमता से कितना बाहर मकलोडगंज

बौद्ध नगरी और विश्व विख्यात पर्यटन स्थल मकलोडगंज की खूबसूरती को अवैध निर्माण ने ग्रहण लगा दिया है। सैलानियों की बढ़ती आमद के दबाव में व्यवसायियों ने देवदार से लकदक इस खूबसूरत क्षेत्र को कंकरीट का जंगल बना दिया है। न कोई प्लानिंग , न सांस…

क्षमता से कितना बाहर शिमला

शिमला शहर  अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा भार ढो रहा है। कभी अंग्रेजों ने 25 हजार की आबादी के लिए यह नगर बसाया था, लेकिन आज इसकी जनसंख्या अढ़ाई लाख को भी पार कर गई है। यहां  निर्माण भी बेतरतीब किया गया है। चारों ओर इमारतें बनाने की होड़ मची हुई…

कुल्लू से नाराज कुदरत

जाती-जाती बरसात कुल्लू-मनाली को तो तबाह कर गई, पर साथ ही संदेश भी दे गई कि अभी वक्त है...संभाल लो खुद को, बचा लो प्रकृति, मत बदलो नदी-नालों का बहाव। किसी समय अपनी प्राकृतिक छटा से सबको आनंदित कर देने वाली मनाली आज कराह रही है अपने रंग-रूप…

सितमगर कुदरत

हिमाचल में मानसून हर साल कहर बनकर बरप रहा है। प्रदेश को बरसात से करोड़ों का नुकसान हो रहा है। कहीं अवैध खनन तो कहीं बिजली परियोजनाओं के लिए जारी ब्लास्टिंग से पहाड़ खोखले हो रहे हैं । पर्यावरण से की जा रही यही छेड़छाड़ घातक सिद्ध हो रही…

सिसकता बड़ा भंगाल तड़पता गिरिपार

हिमाचल के सबसे बड़े जिला कांगड़ा का दुर्गम क्षेत्र बड़ा भंगाल और सिरमौर जिला का दूरवर्ती इलाका गिरिपार जनजातीय हक के लिए लड़ रहे हैं। प्रदेश में ये दोनों क्षेत्र ऐसे हैं जो आज भी शेष विश्व से साल भर कटे रहते हैं। न अस्पताल, न डिस्पेंसरी,…

पिं‌जरे में बंद हिमाचल

प्रदेश की 2301 पंचायतें बंदरों और आवारा पशुओ से त्रस्त चंबा से किन्नौर, ऊना से लाहुल तक आवारा पशुओं और बंदरों के आतंक से पूरा प्रदेश त्रस्त है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि दिन में बंदर तो रात को आवारा पशु फसलों को चट कर रहे हैं । स्थिति…

हिमाचल की गोल्डन बेटियां

एशियाई गेम्स में छोटे से पहाड़ी प्रदेश का प्रदर्शन इस बार भी उम्दा रहा । इस बार पहाड़ की बेटियां बेशक गोल्ड से चूक गईं, पर रजत पदक लेकर प्रदेश का नाम रोशन किया है। हिमाचल में किस तरह ट्रेंड हो रहे हैं खिलाड़ी... इसी की तफतीश करता इस बार का…

मानसून सत्र 27 घंटे, 45 सवाल!

27 घंटे 14 मिनट और 39 सेकंड चले मानसून सत्र में सरकार का डिफेंस और विपक्ष का वार देखने को मिला। सात दिन में सदन के भीतर किस तरह का माहौल रहा,  हमारे प्रतिनिधियों ने किन-किन मसलों को सदन पटल पर रखा और सरकार ने कैसे अपना पक्ष प्रस्तुत किया,…

पर्यटन नहीं… भीड़ है

सवारी बाइक की, न हेलमेट; न लाइसेंस... न ही स्पीड पर लगाम। अब इन्हें तो पर्यटक नहीं कह सकते। कभी त्रियूंड, तो कभी शिकारी देवी पहुंचने वाले ऐसे सैलानी हमारी आर्थिकी में योगदान तो नहीं देते , लेकिन चिट्टा, डेंगू और देह व्यापार से देवभूमि को…

विकास की लंगड़ी दौड़

मौसम की मार से हिमाचल पस्त बरसात से बुरी तरह जख्मी हिमाचल के दर्द से केंद्र सरकार अनजान है। हर सेक्टर को भारी -भरकम नुकसान की भरपाई के लिए मिलने वाला बजट ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। अगर केंद्र से पर्याप्त मदद मिले, तभी बात बनेगी ...…

शिक्षा में हिमाचली युवा

प्रदेश के इंजीनियरिंग कालेजों का सूखा बताता है कि पहाड़ का नौजवान अब इस करियर में रुचि नहीं रखता है। दूसरी ओर... मेडिकल कालेजों में सालाना 700 नए डाक्टरों का तैयार होना दर्शाता है कि मेडिकल लाइन ही राइट च्वाइस है। रैंकिंग की जाए तो इसके बाद…