वैचारिक लेख

उत्तरी गोलार्ध के शंकुधारी जंगल जलवायु को प्रभावित करते हैं और पानी का व्यवस्थापन अन्य तरीके से भी करते हैं। शंकुधारी पेड़ ‘टेरपीन्स’ छोड़ते हैं जो ऐसे पदार्थ होते हैं जो प्रमुख रूप से बीमारी और कीटों के बचाव के लिए बने होते हैं। विंध्याचल और सतपुड़ा के पर्णपाती जंगलों में गर्मी के दिनों में

बहुत से अमीर लोगों, जो अपने विवाह-शादियों में अरबों रुपए पानी की तरह बहाते हैं, उन्हें भी इतना पैसा खर्च नहीं करना चाहिए। इस पैसे को बचाकर मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करवा देना चाहिए… दुनिया में हर वर्ष लगभग 93 करोड़ टन भोजन बर्बाद हो जाता है जो कि बहुत बड़ी बर्बादी है। इस

देश में पिछले चंद दिनों से जो दो विषय चर्चाओं में है उनमें एक है ईडी और दूसरा अग्निपथ पर चलने वाला अग्निवीर। जिस तरह से ईडी ने पहले हिमाचल में पांव पसार रही आम आदमी पार्टी के राज्य प्रभारी दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की पूछताछ के बाद गिरफ्तारी की और उसके बाद

अब जाकर जम्मू-कश्मीर सरकार ने ज़हर के इस स्रोत को पहचाना है और उसको रोकने का प्रयास किया है। राज्य सरकार ने जमायते इस्लामी के लगभग तीन सौ स्कूलों को बंद करने का निर्णय किया है। दरअसल यह काम सरकार को बहुत पहले ही करना चाहिए था। अंग्रेज़ी भाषा में जिसे कहते हैं ‘टू निप

आज आधुनिकता की इस अंधी दौड़ में इनसान को अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है क्योंकि आज मिट्टी, पानी व हवा यानी हर जगह जहर ही जहर है जिसके कारण कोरोना जैसे भयंकर रोग हो रहे हैं। योग जीवन के लिए जरूरी है… विश्व योग दिवस की नींव भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र

वे मेरे जैसे लेखक नहीं थे, वे दूसरे टाइप के लेखक थे। मेरा काम लिखना और छपवाना था, उनका इससे दूर-दूर तक का नाता न था। दरअस्ल वे लेखक टाइप बुद्धिजीवी थे, जो गोष्ठियों में गहन विमर्श, उनकी अध्यक्षता और कहीं व्याख्यान देते पाए जाते थे। मुझसे यह सब नहीं हो पाता था। कहीं कोई

हिमाचल प्रदेश में 41 औद्योगिक क्षेत्रों का विकास किया गया है। हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम ने हिमाचल में विभिन्न विधाओं में प्रशिक्षण और रोज़गार के अवसर प्रदान कर बहुत सराहनीय कार्य किया है। प्रबंध निदेशक कुमुद सिंह और उनकी टीम ने कौशल  विकास को एक नया स्वरूप दिया है… हिमाचल प्रदेश का एक ख़ास

बेशक साहिब, यह एक बहुत पुराना देसी फिल्मी गाना है कि ‘डर लगे तो गाना गा’। यह एक भूतिया अंधेरी फिल्म थी, जिसमें अनजाने अनचाहे भूतों से डरते हुए एक आदम की हवेली में नायक और उसका हंसोड़ साथ टूटी-फूटी सीढि़यों पर गिरते-पड़ते हैं। लगता है अभी भी कोई भूत प्रगट हुआ के हुआ और

गांधी जी के सपनों का भारत गांवों में बसता था और इसके लिए वे ग्राम स्वराज, पंचायती राज, ग्रामोद्योग, महिलाओं की शिक्षा, गांवों में स्वच्छता, गांवों का आरोग्य और समग्र ग्राम विकास आदि को प्रमुख मानते थे। महात्मा गांधी ने ‘मेरे सपनों का भारत’ में लिखा है, ‘भारत की हर चीज़ मुझे आकर्षित करती है।