भविष्य का उपभोग करते हम

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं नुकसान सिर्फ तापमान की बढ़ोतरी तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसका व्यापक प्रभाव है। हम जैसे- जैसे प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं वैसे-वैसे अस्थाई सुविधा, थोड़े से स्वाद, समय की बचत…

नक्सल समस्या के समाधान की राह

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह और प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव की राजनीतिक इच्छाशक्ति तथा केपीएस गिल का दृढ़ निश्चय पंजाब में आतंकवाद के खात्मे का कारण बने। बेअंत सिंह सन् 1992 में…

वैमनस्य फैलाने की राजनीतिक लत

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं हमें ऐसे नेताओं की आवश्यकता है जो किसी जाति, धर्म अथवा संप्रदाय विशेष के  प्रवक्ता न होकर, समूचे राष्ट्र के  प्रवक्ता हों। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, लोकनायक जय प्रकाश नारायण ऐसे ही…

अभी अप्रासंगिक नहीं हुए केजरीवाल

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं राजनीति में सबको आश्चर्यचकित कर देने वाले एक और शख्स ऐसे हैं, जिनके जिक्र के बिना राजनीति की रणनीति की चर्चा अधूरी रहेगी। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ऐसे व्यक्ति हैं,…

कसूरवार तो केजरीवाल भी हैं

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं अरविंद केजरीवाल को जनता का विश्वास मिला था, लेकिन मोदी ने उपराज्यपाल के माध्यम से जनमत को रौंद डाला। यह अलग बात है कि खुद अरविंद केजरीवाल ने भी अपनी राष्ट्रीय महत्त्वाकांक्षाओं के…

कार्रवाई का इंतजार करता देश

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं सारा देश इस मामले में सेना के साथ है और लोग मोदी की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं कि वह कोई ठोस कार्रवाई करें तथा स्थिति को और बिगड़ने से बचाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएं। यह…

अराजकता पर आत्ममंथन करे ‘आप’

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं अगर भाजपा को जीत मिली है, तो इसका एक ही कारण है कि कांग्रेस जनता का विश्वास दोबारा पाने में तो असफल रही ही है, आम आदमी पार्टी ने भी लोगों का विश्वास खोया है। केजरीवाल और उनके…

घाटी में प्रेम मार्ग अपनाए सरकार

पीके खुराना पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं जिन इलाकों में चरमपंथी गतिविधियां न हों, वहां आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट की जरूरत नहीं है। समय की मांग है कि प्रशासन लोगों से ज्यादा रू-ब-रू हो, उनके सुख-दुख में…

संसदीय प्रणाली के स्याह पक्ष

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं समस्या यह है कि शालीन विरोध का सरकार पर कोई असर नहीं होता और मंत्रिगण कानून में बदलाव के विपक्ष के किसी सुझाव को मानने के लिए तैयार नहीं होते। परिणामस्वरूप अपनी उपस्थिति जताने तथा…

लोकतंत्र की नई खिड़की

पीके खुराना पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं धमीजा का मानना है कि हमें खुले दिमाग से सोचना चाहिए। बंद दिमाग या तंग दिमाग समाज के पतन का कारण बनता है। प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित धमीजा की पुस्तक हिंदी में होने के…

न्याय की आस में खेती

पीके खुराना पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं खेती को अकुशल कार्य माना गया है और यह कहा गया है कि किसान साल में केवल 160 दिन काम करता है। इस तरह खेती की उपज का हिसाब बनाते समय उसकी मजदूरी कम लगाई जाती है।…

मोदी-शाह का मिशन-2019

पीके खुराना ( पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं ) नरेंद्र मोदी की अब तक की रणनीति के विश्लेषण से यह स्पष्ट है कि प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से हिंदुओं को संतुष्ट करने के बावजूद यहां भी मोदी के विकास के एजेंडे पर बात…

 अब ईवीएम पर घमासान

पीके खुराना ( पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं ) ईवीएम मशीन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। मायावाती, केजरीवाल और कांग्रेस के विभिन्न नेताओं ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाए हैं। मायावती ने सबसे पहले बयान…

ढर्रे में सिमटता महिला दिवस

पीके खुराना ( पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं ) सफल महिलाओं का उदाहरण दे-देकर शेष समाज को बार-बार यह बताया जाता है कि महिलाएं पुरुषों से कम नहीं हैं, जबकि होना यह चाहिए कि महिलाओं को पुरुषों के सोचने के ढंग और…

भीड़ खींचने के नए तमाशे

पीके खुराना ( लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं ) भीड़ की अनुपस्थिति ने अन्ना हजारे को अप्रासंगिक बना दिया है और भीड़ खींचने के प्रयास में एक शहीद की बेटी झूठ बोलने पर आमादा है। एक समाज के रूप में हम सच कहने और सुनने की कूव्वत…