
बेटी के जन्म पर दुखी होने वालों को समझना होगा कि हम बेटों को बुढ़ापे का सहारा मानते हैं तो समाज में ऐसे बेटों की भी कमी नहीं है जिन्होंने मां-बाप के जीवन को नर्क बना दिया और ऐसी बेटियों की भी कमी नहीं है जिन्होंने अपने मां-बाप में से किसी एक के अकेले रह जाने पर उनको सहारा दिया, साथ दिया, प्यार दिया, बेटी के बजाय मां बनकर देखभाल की। गुरु नानक देव जी ने बहुत ही सटीक बात कही है - ‘सो क्यों मंदा आखिए, जिन जम्मे राजे’, यानी हम महिलाओं को नीची नजर से कैसे देख सकते हैं ज
स्पिरिचुअल हीलिंग कोई जादू-टोना नहीं है, कोई अंधविश्वास नहीं है, बल्कि एक प्रभावी टूल है जो हमारे दिल, दिमाग और आत्मा से कूड़ा चुनकर उसे निर्मल बना देती है। स्पिरिचुअल हीलिंग की सबसे बड़ी खूबी यह है कि स्पिरिचुअल हीलर को आपकी उंगली भी छूने की आवश्यकता नहीं है और यह ऑनलाइन भी हो सकती है। मैं मीडिया घरानों का शुक्रगुजार हूं कि उनकी सीख के कारण परमात्मा ने मुझ पर कृपा की और स्पिरिचुअल हीलर बनकर समाज सेवा करने के काबिल हो सका। जीवन की यह समझ मुझे ‘दिव्य हिमाचल’ स
सहज संन्यास घर छोडऩे, परिवार छोडऩे, दुनिया छोडऩे, कपड़े रंगवाने, सिर मुंडाने या बाल बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है। हम जैसे हैं, वैसे ही रहें। हम जो काम कर रहे हैं, वो पूरी तन्मयता से, पूरी ईमानदारी से, पूरी लगन से, पूरी मेहनत से, पूरी निष्ठा से, पूरी काबलियत से करें। जो करें वह ऐसा हो जो सबके भले के लिए हो, तो हम संन्यासी हैं। जब हम लालच छोड़ दें, क्रोध छोड़ दें, ईष्र्या छोड़ दें, ऊंच-नीच का विचार
मैं फिर से दोहराता हूं कि हमारी कामना के फलीभूत होने का सीक्रेट, यानी रहस्य यह है कि हम इच्छा करें, सपने देखें, और ग्रेटेस्ट सीक्रेट यह है कि हम जिस चीज के सपने देख रहे हों, उसे पाने के लिए सार्थक प्रयत्न भी करें, क्योंकि असली काम तो काम ही है। इसके बिना जो कुछ है वो केवल मुंगेरी लाल के हसीन सपने, या यूं कहें कि शेखचिल्ली के सपनों के समान है, जिसका अंत निराशा और हताशा में होने की संभावना सबसे ज्यादा है।
उनकी क्लास के कुछ बच्चे स्कूल के बाद ट्यूशन पढऩे चले जाते हैं, कुछ बच्चे डे-केयर सेंटर में चले जाते हैं और स्कूल में जितना समय बिताते हैं, उतना अपने मां-बाप के साथ भी नहीं बिता पाते। वे अलग-अलग बच्चों का, उनके स्वभाव का, उनकी खूबियों का और उनकी समस्याओं का आकलन करती हैं। यही नहीं, पेरेंट-टीचर मीट के समय बच्चों के मां-बाप के साथ घुलमिल कर बच्चों के बारे में और जानकारी लेकर सभी बच्चों की जरूरतों के मु
जब कोई व्यक्ति हमें कोई ऐसी बात बताए जो हमें पहले से मालूम हो तो यह कहने के बजाय कि मुझे पता है, हम अगर कहें कि आप सही कह रहे हैं तो कितना अच्छा होगा? किसी के साथ बहस के समय अगर हम ऐसा करें तो बहस की गर्मी और कड़वाहट खत्म हो जाती है। तब वह बहस के बजाय एक-दूसरे का नजरिया समझने का जरिया बन जाती है। इसी तरह अगर हम किसी को अपनी बात समझा रहे हों तो यह कहने के बजाय कि आपके कोई सवाल हों तो पूछ लीजिए, हम अगर यह कहें कि आपके सवाल क्या हैं, तो सामने वाले को अपनी बात कहने में झिझक नहीं होगी,
निश्चल बैठ कर सांसों पर नियंत्रण और साथ में मौन, मानो सोने पर सुहागा है। मौन रहने का अभ्यास हमें अंतर्मन की यात्रा में ले चलता है, हम बाहरी जगत की ओर से ध्यान हटाकर अपने ही भीतर जाने लगते हैं। पूजा, भजन, कीर्तन आदि क्रियाएं अच्छी हैं, पर ये शुरुआती साधन हैं। आध्यात्मिकता में आगे बढऩे के लिए माइंडफुलनेस, गहरी लंबी सांसें और मौन बहुत लाभदायक हैं। अध्यात्म की अगली सीढ़ी है निश्छल प्रेम, हर किसी से प्रेम, बिना कारण, बिना आशा के हर किसी से प्रेम। मानवों से ही नहीं, पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों से भी प्रेम, जीवित लोगों से ही नहीं, जीवन रहित मानी जाने वाली चीजों से भी प्रेम। एक बार जब हम प्रेममय हो गए तो आध्यात्मिकता की गहराइयों में चले जाते हैं...
आज जब हम आधुनिकता के चक्कर में पडक़र अत्यंत विषैला जीवन जी रहे हैं तो आध्यात्मिक चिकित्सा इसका सबसे बढिय़ा उपचार तो है ही, इससे भी आगे बढक़र यह हमारी विचारधारा को बदल देती है, हमें जीवन का वह सत्य सिखाती है जिससे हम जीवन को बेहतर समझ पाने के काबिल हो जाते हैं। आध्यात्मिक चिकित्सा हमें उस स्तर तक ले जा सकती है जिसे गीता में भगवान श्री कृष्ण ने निष्काम कर्म कहा है। जब सारी दुनिया नाच रही
खुशियों का मूल मंत्र बस इतना-सा ही है। इससे भी आगे बढक़र देखें तो खुशी एक ऐसी जरूरत है जिसके लिए पैसे खर्च नहीं होते। गर्मियों में शीतल हवा में बैठना और सर्दियों में गुनगुनी धूप में बैठकर विटामिन-डी लेना मुफ्त है। पेड़-पौधों, फूलों-पत्तियों का आनंद लेना मुफ्त है। किसी को गले लगाना मुफ्त है। किसी को दो मीठे बोल बोल देना मुफ्त है। किसी की बात सुन लेना मुफ्त है। सैर करना मुफ्त है। कसरत करना मुफ्त है। प्राणायाम मुफ्त है। ध्यान करना मुफ्त है। अपनी छोटी-छोटी सफलताओं पर खुश होना मुफ्त है। अपने बच्चों की देखभाल करना, उन्हें समय देना, उनकी प्यारी-प्यारी बातें सुनना मुफ्त है। अपने लक्ष्य की तरफ टिके रहना मुफ्त है। खुश रहना और खुश रखना मुफ्त है...