वक्त और भरोसे का जनादेश

पीके खुराना राजनीतिक रणनीतिकार जिसे कांग्रेसी अपनी जीत मान रहे हैं, वह कांग्रेस की जीत नहीं है। यदि लोग कांग्रेस से खुश होते, तो वह मिजोरम में सत्ता से बाहर न कर दी जाती। यदि लोग कांग्रेस से खुश होते, तो तेलंगाना में कांग्रेस की ऐसी…

मतदाता को गुस्सा क्यों आता है

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक सच यह है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस नहीं जीती है, बल्कि भाजपा हारी है। हवाई वादे, काम के बजाय प्रचार, दमन चक्र और झूठ की चादर आदि कारणों से मतदाताओं में नाराजगी…

भारत में जनहित के कानून क्यों नहीं बनते

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं सदन का स्थगन रीति बन गया और कोरम पूरा करके सदन की कार्यवाही चलाने के लिए सांसदों को घेर कर लाने की आवश्यकता पड़ने लगी। परिणामस्वरूप संसद में पेश बिल बिना किसी जांच-परख के ध्वनि मत…

भाजपा, हिंदुत्व और मतदाता

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं यह एक तथ्य है कि मुज्ज्फरनगर के दंगों में मुस्लिम समाज को ज्यादा क्षति पहुंची, उनके ज्यादा लोग मरे, लेकिन भाजपा ने जानबूझकर गलत आंकड़े पेश किए। अखिलेश यादव ने छात्रवृत्तियां…

काले धन की जड़ कहां है ?

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं अब समय आ गया है कि हम राजनीतिक दलों और राजनीतिज्ञों से ही नहीं, बल्कि चुनाव आयोग से भी पूछें कि देश में चुनाव के खर्च को लेकर यह पाखंड क्यों चल रहा है? चुनाव में काले धन का प्रयोग…

पटेल की प्रतिमा से जुड़े सवाल

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं सरदार पटेल की मूर्ति के उद्घाटन के बाद वहां पर्यटकों का तांता लग गया। इस परिसर में निजी वाहनों को सीधे प्रवेश नहीं मिलता और परिसर के बाहर पार्किंग की कोई सुविधा नहीं है, वाहनों और…

खतरे में मोदी-शाह की सियासत

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं भाजपा में यूं भी अब लोग स्वयं को घुटा-घुटा सा महसूस करते हैं और कुछ भी बोलने की हिम्मत नहीं करते, लेकिन चुनाव के समय टिकटें न मिलने पर असंतोष का जो लावा फूटेगा, उसे संभाल पाना मोदी…

शोरगुल में गुम होते मुख्य मुद्दे

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं सवाल सरकार से पूछे जाते हैं, जवाबदेही सरकार की होती है, जनता सवाल पूछती है, जवाब सरकार को देना होता है। इसलिए विकास में कमी रहने पर मोदी यह नहीं कह सकते कि बताओ केजरीवाल ने क्या…

आपाधापी और बेशर्मी बनी पहचान

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं ‘मी टू’ जैसे संवेदनशील मामले में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर का नाम आने के बावजूद सरकार बेशर्मी से उनका बचाव कर रही है। अमित शाह के बेटे जयशाह का घोटाला तो बहुचर्चित हुआ ही,…

शोषित महिलाओं की आवाज-मी टू

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं सवाल यह है कि इस अवस्था में हमें क्या करना चाहिए? हमारे समाज की सोच क्या होनी चाहिए? क्या हम अपनी बेटियों को असुरक्षित छोड़ देना चाहते हैं? हम एक धार्मिक समाज हैं, नैतिकता की…

गांधी जी को कोसना तर्कसंगत नहीं

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं शहीद भगत सिंह के खिलाफ गवाही देने वाले उनके देशद्रोही साथियों की निंदा नहीं की जाती, क्योंकि उससे राजनीतिक लाभ नहीं मिलता, जबकि गांधी जी की निंदा का राजनीतिक लाभ है। लब्बोलुआब यह…

झूठ का पुलिंदा है ‘आयुष्मान भारत’

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं इस योजना के माध्यम से लोगों के स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी इकट्ठी की जाएगी। आयकर दाताओं की जेब से टैक्स के रूप में निकले हजारों करोड़ रुपए की लागत से लगभग 50 करोड़ लोगों का डेटा…

संघ के स्वरूप में बदलाव के निहितार्थ

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं दरअसल, मुस्लिम विरोध की उग्रता में मोदी और शाह बहुत आगे चले गए थे और हिंदू राष्ट्र के निर्माण को लेकर उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं के मन में इतनी उम्मीदें जगा दी थीं कि अब वापस…

भ्रष्टाचार और चुनाव प्रणाली

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं शहाबुद्दीन याकूब कुरैशी ने इस बहस को शुरू करते हुए ‘दि हिंदू’ को दिए अपने इंटरव्यू में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली का पक्ष लिया। उन्होंने चुनाव प्रणाली से जुड़े कई और मुद्दों पर…

भारतीय राजनीति के अंधेरे-उजाले

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं पिछले वर्ष के वित्त विधेयक में सरकार ने यह प्रावधान किया था कि विदेशी कारपोरेट कंपनियां राजनीतिक दलों को गुप्त रूप से भी फंड दे सकती हैं, उसकी कोई उच्चतम सीमा भी नहीं होगी और उनसे…