प्रताप सिंह पटियाल

अफसोसजनक है कि हमारे धार्मिक स्थलों को ध्वस्त करके बेगुनाहों का खून बहाकर धर्मांतरण व कई नगरों का नाम तब्दील करने वाले विदेशी आक्रांताओं को महान् पढ़ाया गया, मगर तलवार से दुश्मन का हलक सुखाकर भारत की गौरव पताका फहराने वाले, धर्म-संस्कृति, आत्मसम्मान के रक्षक व मातृभूमि का रक्त से अभिषेक करने वाले राष्ट्रनायक महाराणा

सियासी रहनुमा बनना ही सियासत नहीं है। जनता के चुने गए प्रतिनिधियों में समाज को सही दिशा देने तथा सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए खुद मजबूती से फैसले लेने की कूवत भी होनी चाहिए… हमारे देश में सियासत, मायानगरी तथा क्रिकेट तीनों विषय सबसे ज्यादा चर्चा का केंद्र रहते हैं। तीनों ही प्रोफैशन को देश

देश की आज़ादी व स्वाभिमान के लिए बलिदान देकर शौर्यगाथाओं के मजमून लिखने वाले वीरभूमि के शूरवीरों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलनी चाहिए। साथ ही हिमाचल रेजिमेंट भी दी जाए… देश की आजादी के बाद 15 अप्रैल 1948 को 30 पहाड़ी रियासतों के एकीकरण के साथ हिमाचल प्रदेश स्वतंत्र भारत की इकाई के रूप

कोरोना संक्रमण का मिजाज समझ कर एहतियात बरतने की जरूरत है। देश में कोरोना टीकाकरण की मुहिम चल रही है, मगर स्थिति सामान्य होने तक शारीरिक दूरी, हैंड सेनेटाइजर का उपयोग व मास्क को लिबास का जरूरी हिस्सा बनाकर कोरोना गाइडलाइन का अनुपालन पूरी शिद्दत से एक समान करना होगा। इस महामारी से अपने को

समाज में बढ़ती नशाखोरी की घटनाएं, आत्महत्याएं, संगीन अपराधों में इजाफा, नस्लभेद, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना, बॉलीवुड में अश्लीलता व समाज में दरकते पारिवारिक रिश्ते इसी पश्चिमी विचारधारा का प्रदूषण व विकृत मानसिकता की देन है। सामाजिक संस्कारों को दूषित करने वाली इन चीजों को आधुनिकता नहीं कहा जा सकता। बहरहाल सत्य, अहिंसा, शिष्टाचार,

लाजिमी है कि खुशनुमा पर्वतों का प्राकृतिक स्वरूप बदलने से पहले इन पहाड़ों के संवेदनशील मिजाज, खुसूसियत व इनके प्राचीन रहस्यों के बारे में जानना जरूरी है। देश में किसी भी संवेदनशील विषय पर टीवी डिबेट, विश्लेषण, मंथन व शोध विकराल आपदा के बाद ही शुरू होता है। विनाशलीला को प्राकृतिक आपदा की दलीलें देकर

यदि शुद्ध हिमाचली भुट्टे (मक्की) की लज्जत व अन्य पहाड़ी लजीज व्यजनों का जायका कायम रखना है तो परंपरागत फसलों को बचाकर इनके संरक्षण की पैरवी करनी होगी… हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी में कृषि, बागबानी तथा पशुपालन व्यवसाय का विशेष महत्त्व व योगदान रहा है। राज्य की लगभग 90 प्रतिशत ग्रामीण आबादी का एक बड़ा

प्रताप सिंह पटियाल, लेखक बिलासपुर से हैं देश में लव जिहाद व धर्मांतरण जैसी साजिश पर राजनीतिक गलियारों की सियासी हरारत भी खूब बढ़ती है। इन मसलों पर न्यायपालिकाएं भी चिंता जताकर सरकारों को आगाह करती आई हैं। अपराध मिटाने के लिए कानून के साथ जुल्मी मानसिकता के जहन में प्रहार की जरूरत है… पुरातन काल

प्रताप सिंह पटियाल लेखक बिलासपुर से हैं बहरहाल 1971 की निर्णायक जंग में पाक सेना से लोहा लेकर हिमाचल के 195 रणबांकुरों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था जिनमें 27 शहीद जांबाजों का संबंध जिला बिलासपुर से था। लेकिन खेद की बात है कि जंगबंदी के बाद भारत ने 1972 में शिमला समझौते के

देश के लिए हिमाचल का सैन्य बलिदान हमेशा अग्रणी रहा है। इसलिए देश के कुछ नेताओं तथा मायानगरी के अदाकारों को भी वीरभूमि हिमाचल पर लफ्फाजी करने से परहेज करना होगा। इसके अलावा हमारे देश के कुछ हुक्मरान ‘पीओके’ को वापस लेने की ख्वाहिश जाहिर करते हैं, जबकि यह जोखिम भरा काम भी हमारी सैन्यशक्ति