भानु धमीजा

हम ढुलमुल भारतीयों ने विपरीत दिशा पकड़ी, और केंद्रीकृत सरकार की ब्रिटिश किस्म को अपना लिया। हमने कई अमरीकी सिद्धांतों...

हमारे विकल्प ये हैंः वर्तमान धर्मनिरपेक्षता जारी रखें, अमरीका जैसी धर्मनिरपेक्षता अपनाएं, धर्म राज्य की स्थापना करें, या कुछ नया...

उपाध्याय जीवन पर्यंत हमारे संविधान के आलोचक रहे। वर्ष 1965 में उन्होंने अपने ‘एकात्म मानववाद’ (Integral Humanism) के सिद्धांतों के...

भारत द्वारा अपनाए गए संविधान को लेकर जो बात अंबेडकर को सर्वाधिक परेशान करती थी वह थी इसमें निहित बहुसंख्यकवाद...

समय आ गया है कि हम भारतीय अपनी सरकार की प्रणाली पर एक कठोर नई दृष्टि डालें। सिद्धांतों में कमजोर...

हिंदू राष्ट्र व अखंड भारत, दोनों अभियान असफल होने की आशंका है। अखंड भारत का पुनर्निर्माण पहुंच से परे, और हिंदू राष्ट्र अंततः आत्मघाती लगता है। एक वृहद् भारत के निर्माण की अभिलाषा सफल होने के यदि अवसर हैं तो वे समान विचार वाले देशों का एक संघ, भारत महासंघ, बनाकर यथार्थ किए जा सकते हैं...

भारतीय न्यायपालिका ने अत्यधिक मामलों में न्याय न देकर, लटकाकर, या आधा-अधूरा काम कर अन्याय किया है। इसके प्रदर्शन के कुछ मापदंडों पर विचार करें। भारतीय अदालतों में दो करोड़ बीस लाख से अधिक केस लंबित हैं। जिनमें से 60 लाख पांच वर्ष से ज्यादा समय से लटके हैं।

भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं किसी देश के...

भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं मूल ढांचा सिद्धांत...